राजकुमार भाटी द्वारा आंबेडकर की प्रतिज्ञाएं पढ़े जाने पर मचे बवाल ने संख्या-आधारित सामाजिक जोड़-तोड़ की लोहियावादी नीति को फिर से जीवित करने की सपा की कोशिशों की सीमाएं दिखा दी हैं

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स्रोत: The Hindu