नए शोध में पाया गया है कि कश्मीर की पारंपरिक धान किस्मों में ठंड सहन करने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढले ऐसे जीन मौजूद हैं, जिन्हें आधुनिक किस्में आंशिक रूप से खो चुकी हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों पर बढ़ते दबाव के बीच ये किस्में संभावित रूप से काफी मूल्यवान साबित हो सकती हैं। विश्लेषण से यह भी संकेत मिला कि इन किस्मों का संबंध कोरियाई प्रायद्वीप और उत्तर-पूर्वी चीन की किस्मों से अधिक निकट है।
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